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बिपन चन्द्रा होने का मायने

Bipan Chandra

आलोक बाजपेयी

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अक्टूबर 2014- मार्च 2015 

प्रोफेसर बिपन चन्द्र (1928-2014) एक संस्था थे। भारत के मार्क्सवादी इतिहासकारों की श्रृंखला में आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भों में से एक। आधुनिक भारत की एक मुकम्मल तस्वीर उन्होंने गहन शोधों एवं मार्क्सवादी अंतर्दृष्टियों के आधार पर अपनी किताबों और शोध-पत्रों के माध्यम से बनाई और उसे एक अकेडमिक एक्टिविस्ट के तौर से फैलाया भी। भारतीय राष्ट्रवाद का स्वरूप, उपनिवेशवाद, भारत में साम्प्रदायिकता, भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन, आजादी के बाद के भारत का लेखा-जोखा, सामयिक आसन्न खतरे, भारत में मार्क्सवाद की उपलब्धियां व महत्व तथा भारतीय मार्क्सवाद के समक्ष चुनौतियां, महात्मा गांधी व जवाहर लाल नेहरू का ऐतिहासिक मूल्यांकन जैसे कई विषयों पर उन्होंने आधिकारिक ढ़ंग से मूलभूत मार्क्सवादी अंतर्दृष्टि ’’ऐतिहासिक भौतिकवाद’’ के आधार पर लिखा। कह सकते हैं कि प्रो0 बिपन चन्द्र को पढ़े, समझे बिना आज के हिन्दुस्तान को समझना शायद ही संभव हो।

व्यक्तित्व के रूप में देखें तो वो एक व्यापक अर्थ…

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